Koshi River
  • होम
  • जानें
  • रिसर्च
  • संपर्क

कोसी नदी अपडेट - नहरों और नदियों के तटबन्धों के टूटने का वृतांत 1976, बड़हिया (अन्तिम किस्त)

  • By
  • Dr Dinesh kumar Mishra
  • June-18-2023

बड़हिया के श्री कृष्ण मोहन सिंह से हुई मेरी बातचीत


उस समय यहां पक्के मकान तो बहुत कम थे। मिट्टी के गारे और पकाई गयी ईंटों के मकान जरूर थे। मिट्टी की दीवारों वाले और बांस फूस के भी मकान थे। क्योंकि यहां हर तरह के लोग रहते थे और उनके घर भी उसी के अनुरूप थे। क्योंकि उन तीन-चार दिनों में बारिश लगातार होती रही थी तो घर भी काफी गिरे थे। मिट्टी के घरों की दीवार ध्वस्त हो जायेगी तो घर तो नहीं बच पायेगा। जानवर भी बड़ी संख्या में मारे गये थे क्योंकि उनके रहने की जगह तो पानी ने दखल कर ली थी। इसलिये उनकी बड़ी क्षति हुई। आदमी तो दूसरी जगह से भाग कर डीह पर आ गये थे पर जानवरों को कहां रखते? इसलिये उनका तो बहुत नुकसान हुआ। कुछ बह-दह करके मर गये, कुछ लगातार बारिश में ठिठुर कर मर गये तो कुछ दब कर मरे। आमतौर पर लोगों ने खूंटे से बंधे जानवरों को खोल दिया था। खूंटे से बंधा जानवर मर जायेगा तो गौ हत्या लगेगी जिसका दोषी कोई नहीं होना चाहेगा। फिर भी जहां तक संभव हो सका उनको बचा कर रखा गया।

अब तो इतनी बस्ती बढ़ गयी है कि लोगों को भी रहने की कठिनाई हो गयी है यद्यपि हमारा गांव पूरब से पश्चिम खेत और दियारा लेकर 25 किलोमीटर लम्बा और उत्तर से दक्षिण 18 कि.मी. चौड़ा जरूर होगा। क्षेत्रफल के हिसाब से हमारा गांव भारत का सबसे बड़ा गांव है। आबादी की दृष्टि से सुनते हैं कि गहमर सबसे बड़ा गांव है पर क्षेत्रफल तो हमारे ही गाँव का सबसे ज्यादा है।

उस बाढ़ में सड़कें तो पी.डबल्यू. डी. समेत सारी की सारी डूब गयी थीं। किऊल से शेखपुरा और लखीसराय जाने वाली रेल लाइन टूट गयी थी। किउल से जमालपुर-भागलपुर जाने वाली लाइन भी कई स्थानों पर टूट गयी थी। हावड़ा-दिल्ली वाली रेल लाइन टूटने की खबर तो नहीं थी मगर लाइन पर पानी चढ़ने का भी समाचार हमें नहीं मिला था। ब्रांच लाइनें जरूर क्षतिग्रस्त हो गयी थीं। सरकार का हमारे यहां पहुंचने का कोई रास्ता ही नहीं था तो कहां से पहुंचती? दियारे के कुछ इलाकों और टाल क्षेत्र में कुछ स्थानों पर खाने के पैकेट हवाई जहाज/हेलिकॉप्टर से गिराये जाने का समाचार हम लोगों को मिला था। हमारे गाँव में तो कुछ भी नहीं गिराया गया था।

हमारे गांव में घर में रखा अनाज पानी के सम्पर्क में आने पर इतना फूल गया की दीवारों में दरार पड़ गयी। अनाज तो हमारा घरों में ही रहता है। उसे लेकर और कहां रखेंगे। हमारे गांव में फसल तो बहुत होती है पर उसे रखने की जगह तो सीमित ही है।

हम अनाज जहाँ रखते हैं उसे ठेक कहते हैं। लाखों एकड़ का हमारा रकबा है तो उसी के अनुसार हमारे यहाँ अनाज भी पैदा होता है। मगर उसमें पानी घुस जाये तो क्या होगा उसे आप खुद समझ सकते हैं। चने का आकार पानी में फूल कर कितना बड़ा हो जाता है? उन दिनों चना हमारी मुख्य फसल हुआ करती थी। कितने घरों का नुकसान तो चना फूलने पर दीवारों के फटने से हो गया था। बखारी और बेढ़ी में अनाज रखने का रिवाज हमारे यहां नहीं है। बखारी और बेढ़ी में तो अनाज तो वहां रखा जाता है जहां उपज कम होती है। हमारे यहाँ वह सब नहीं चलता है। हमारे अनाज किलो में नहीं क्विंटल में होता है उसके लिये वैसी ही व्यवस्था रखनी पड़ती है। बाकी जगहों के बड़े किसानों के यहां जितना अनाज होता है, उतना अनाज हमारे यहां छोटे किसान को हो जाता है। यह बात अलग है कि हमारे यहां एक ही फसल होती है जबकि दूसरी जगहों पर तीन-तीन फसलें भी हो जाती हैं। फिर भी हमारे यहां एक ही बार में बहुत अनाज हो जाता है। उन दिनों चना खूब होता था पर अब तो चना होता ही नहीं है। होता भी है तो कीड़े खा जाते हैं।

आसपास के दियारे के लोग बाढ़ के समय हमारे गांव में शरण लेने के लिये आ गये थे। दियारे के छोटे-छोटे गांवों के छोटे-छोटे घरों में जब पानी घुसने लगा तो वह सब बड़हिया में आने लगे थे। बड़हिया हाई स्कूल, धर्मशाला, रेलवे स्टेशन सभी लोगों से भरे हुए थे। सरकारी दफ्तरों, उनके स्टाफ क्वार्टरों, थाना और ब्लॉक सब में पानी भरा हुआ था। वह लोग भी हमारे गांव के सिवा और कहां जाते? हमारा बड़हिया का हाई स्कूल 1912 में बना था। हमारी पुरानी पीढ़ी शिक्षा की दृष्टि से जागरूक थी। इन दोनोँ स्कूलों के अलावा तत्कालीन सरकार ने एक ही दिन में बड़हिया, बेगूसराय और जमुई स्वीकृत किया था। इसमें 50 कमरे का छात्रावास, दो भाग में बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें स्कूल की हैं जिनमें लोगों ने शरण ले रखी थी। आसमान से मिलने वाली मदद की हमारे गांव में जरूरत भी नहीं थी। बाहर से जो गरीब-गुर्बा हमारे गांव आये थे उनके लिये स्कूल में और स्टेशन पर खाने पीने की व्यवस्था हुई थी। यहां सर्वोदय के एक नेता जमुना बाबू हुआ करते थे वह पंजाब, हरियाणा से कुछ राहत सामग्री तथा कपड़ा वगैरह लेकर आये थे जिसका वितरण शरणार्थियों के बीच हुआ। उन लोगों के माध्यम से राहत वितरण का काम हुआ था जिसके पीछे जयप्रकाश नारायण और विनोबा भावे की भी कृपा थी।

आटा, कपड़ा, बिस्कुट, भूसा आदि भी धीरे-धीरे काफी मात्रा में आया था। सरकार तो खुद डूबी हुई थी वह हमारी क्या मदद करती। यहां के सब-इंजीनियर का दफ्तर, ब्लॉक, थाना, डाक बंगला आदि सब तो डूबा हुआ था। सरकार तो खुद हमारी शरण लिये हुए थी तो हमको क्या देती? उनके कर्मचारियों का भी तो परिवार था। उनके लिये हम लोगों ने व्यवस्था की थी वरना वह लोग कहाँ जाते?

बाढ़ के ए. एन कॉलेज परिसर, बाढ़ में सरकार और आर्मी का कैंप था, जहाँ से सरकार का राहत कार्यक्रम संचालित होता था। हम लोग तो यहां खुद मौजूद थे। सरकार आयेगी तो सड़क या रेल से आयेगी। यह दोनों साधन बन्द थे तो कहां से आ पाती?

श्री कृष्ण मोहन सिंह


हमसे ईमेल या मैसेज द्वारा सीधे संपर्क करें.

क्या यह आपके लिए प्रासंगिक है? मेसेज छोड़ें.

More

कोसी नदी अपडेट - बावन बीघा के किसानों की कहानी: एक महीने की भागदौड़, फिर भी हाथ खाली

कोसी नदी अपडेट - बावन बीघा के किसानों की कहानी: एक महीने की भागदौड़, फिर भी हाथ खाली

जड़ें बहुत गहरी हैं... 15 मार्च, 1967 का पटना से निकालने वाला सर्चलाइट अखबार पढ़ने को मिल गया। पहली बार राज्य में कॉंग्रेस को हरा कर विपक्ष की...
कोसी नदी अपडेट - रिपोर्ट के साये में छिपा सच और तथ्य, कोसी नदी: बाढ़, अकाल और टूटे हुए सपने

कोसी नदी अपडेट - रिपोर्ट के साये में छिपा सच और तथ्य, कोसी नदी: बाढ़, अकाल और टूटे हुए सपने

बिहार की बाढ़, सूखे और अकाल पर कुछ लिखने की घृष्टता करना मेरा शौक है, पर आज बड़े बुझे मन से कलम उठा रहा हूं।बिहार की बाढ़, सूखे और अकाल का इ...
कोसी नदी अपडेट - प्राकृतिक आपदाएँ और प्रशासनिक उदासीनता: बाढ़, सूखा और नीति की चुनौतियाँ

कोसी नदी अपडेट - प्राकृतिक आपदाएँ और प्रशासनिक उदासीनता: बाढ़, सूखा और नीति की चुनौतियाँ

बाढ़ आती रहेगी, सूखा पड़ता रहेगा और हाहाकार होता रहेगा।कुछ दिन पहले बाढ के मसले पर मैंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के विचार लिखे थे। अब इस समस्या ...
कोसी नदी अपडेट - समुद्र जैसा बिहार: पंडित जवाहरलाल नेहरू की 1961 की प्रेस वार्ता

कोसी नदी अपडेट - समुद्र जैसा बिहार: पंडित जवाहरलाल नेहरू की 1961 की प्रेस वार्ता

केवल याद दिलाने के लिये पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रेस वार्ता, 18 अक्टूबर, 1961, नई दिल्ली1961 में बिहार में बाढ़ से भारी तबाही हुई थी। मुंगे...
कोसी नदी अपडेट - सीमा पार जल विवाद, मिथकों से परे सच की तलाश

कोसी नदी अपडेट - सीमा पार जल विवाद, मिथकों से परे सच की तलाश

नेपाल का पानी छोड़ना और बिहार की बाढ़बिहार में आम धारणा है कि यहाँ बाढ़ नेपाल द्वारा पानी छोड़ देने के कारण आती है। यह सच नहीं है पर इसकी स्वीकृ...
कोसी नदी अपडेट - 1968 की कोसी बाढ़: तटबंधों की राजनीति और जनता की त्रासदी

कोसी नदी अपडेट - 1968 की कोसी बाढ़: तटबंधों की राजनीति और जनता की त्रासदी

चार साल पहले की पोस्ट1968 की कोसी की बाढ़ और मूषक (चूहा) कथाउस समय बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू था और विधानसभा स्थगित थी। अतः बिहार की इस ...
कोसी नदी अपडेट - तटबंधों के बीच की पीड़ा: क्या बदला, क्या नहीं?

कोसी नदी अपडेट - तटबंधों के बीच की पीड़ा: क्या बदला, क्या नहीं?

कोसी तटबन्धों के बीच जीवन की शुरुआत - राज्य के एक वरिष्ठ मंत्री लहटन चौधरी का बिहार विधानसभा में बयान-1959 तबसे अब तक कुछ भी तो नहीं बदला है...
कोसी नदी अपडेट - कोसी तटबंधों के भीतर की जिंदगी और चुनौती

कोसी नदी अपडेट - कोसी तटबंधों के भीतर की जिंदगी और चुनौती

खबर है कि कल दोपहर तक कोसी में 6.81 लाख क्यूसेक पानी आने आने की आशंका है। मैं सिर्फ याद दिलाना चाहता हूँ कि कोसी में अब तक का सर्वाधिक प्रवा...
कोसी नदी अपडेट - भूसे की नाव और सत्तू का सहारा: 1971 की कोसी बाढ़ का सच

कोसी नदी अपडेट - भूसे की नाव और सत्तू का सहारा: 1971 की कोसी बाढ़ का सच

बिहार-बाढ़-सुखाड़-अकाल वहाँ न तो जलावन की व्यवस्था थी और न अनाज का ठिकाना।बिहार के भागलपुर जिले में कुरसेला के पास कोसी और गंगा का संगम होता ह...
कोसी नदी अपडेट - बिहार-बाढ़-सुखाड़-अकाल, जब बाढ़ में तैरते धान ने अकाल को मात दी

कोसी नदी अपडेट - बिहार-बाढ़-सुखाड़-अकाल, जब बाढ़ में तैरते धान ने अकाल को मात दी

बिहार-बाढ़-सुखाड़-अकाल गंगा के उत्तरी बिहार में सुखाड़ या अकाल की चर्चा अजीब लग सकती है, क्योंकि यह क्षेत्र सामान्यतः बाढ़ से प्रभावित माना जा...
कोसी नदी अपडेट - 1973 में सहरसा में बाढ़-सुखाड़-अकाल

कोसी नदी अपडेट - 1973 में सहरसा में बाढ़-सुखाड़-अकाल

सहरसा में कोसी के किनारे जबरदस्त सूखा पड़ जाये, यह सुनने में असंभव सा लगता है। पर यह हुआ था और वह इसलिए भी हुआ क्योंकि 1972 में भी वर्षा कुछ ...
कोसी नदी अपडेट - यह चंगेज़ खाँ की हुकूमत नहीं है तो और क्या है?

कोसी नदी अपडेट - यह चंगेज़ खाँ की हुकूमत नहीं है तो और क्या है?

यह चंगेज़ खाँ की हुकूमत नहीं है तो और क्या है?1961 की चंपारण के धनहा थाने की घटना है। उस साल गंडक नदी का पानी जुलाई महीने के पहले सप्ताह में ...
कोसी नदी अपडेट - बिहार की प्रस्तावित कोसी-मेची लिंक

कोसी नदी अपडेट - बिहार की प्रस्तावित कोसी-मेची लिंक

आज (14 अगस्त, 2024) के दैनिक हिन्दुस्तान में मेरे नाम से 'कोसी से मेची तक जुड जायेंगी बारह नदियाँ' शीर्षक से एक लेख छपा है जिसे पढने से ऐसा ...
कोसी नदी अपडेट - हमारे गाँव कठडूमर की कुछ जमीन कटाव में चली गयी, कुछ बालू बुर्ज हो गयी

कोसी नदी अपडेट - हमारे गाँव कठडूमर की कुछ जमीन कटाव में चली गयी, कुछ बालू बुर्ज हो गयी

हमारे गाँव कठडूमर की कुछ जमीन कटाव में चली गयी, कुछ बालू बुर्ज हो गयी।कोसी तटबंधों के बीच का गाँवकोसी तटबन्धों के बीच एक गाँव है कठडूमर जो स...
कोसी नदी अपडेट - रोहिणी नक्षत्र से हथिया नक्षत्र तक बाढ़ पर बहस और फिर शान्ति

कोसी नदी अपडेट - रोहिणी नक्षत्र से हथिया नक्षत्र तक बाढ़ पर बहस और फिर शान्ति

22 सितंबर, 1954 के दिन बिहार विधानसभा में तत्कालीन वित्त मंत्री अनुग्रह नारायण सिंह का बिहार अप्रोप्रीऐशन बिल पर भाषण चल रहा था, जिसमें उन्ह...
कोसी नदी अपडेट - बिहार: बाढ़-सुखाड़-अकाल, रोहतास और कैमूर जिलों पर प्रभाव (1966-67)

कोसी नदी अपडेट - बिहार: बाढ़-सुखाड़-अकाल, रोहतास और कैमूर जिलों पर प्रभाव (1966-67)

1966-67 में बिहार में भयंकर अकाल पड़ गया था जो सरकार द्वारा घोषित भी किया गया था। इसकी भयावह कहानियां राज्य के बहुत से हिस्सों से सुनने में आ...
कोसी नदी अपडेट - बिहार विधानसभा में श्री परमेश्वर कुँवर का सर्वकालिक भाषण (1968)

कोसी नदी अपडेट - बिहार विधानसभा में श्री परमेश्वर कुँवर का सर्वकालिक भाषण (1968)

परमेश्वर कुंवर का बिहार विधानसभा में सर्वकालिक भाषण (1968) जो 56 साल पहले दिया गया था। चाहे कांग्रेस की सरकार हो, चाहे गैर-कांग्रेसी सरका...
कोसी नदी अपडेट - पर्यावरण दिवस पर विशेष, प्रकृति से संघर्ष या समन्वय?

कोसी नदी अपडेट - पर्यावरण दिवस पर विशेष, प्रकृति से संघर्ष या समन्वय?

महाभारत का एक प्रसंग है कि युद्ध के बाद पितामह भीष्म सर-शैया पर लेटे हुए अपनी मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहे थे। उनके पास पांडव राजनीति सीखने के...
कोसी नदी अपडेट - 1967 का बिहार का अकाल और विधानसभा में हुई दिलचस्प बहस

कोसी नदी अपडेट - 1967 का बिहार का अकाल और विधानसभा में हुई दिलचस्प बहस

आजादी के बीस साल बाद बिहार में पहली बार 5 मार्च, 1967 के दिन एक गैर-कॉन्ग्रेसी सरकार का गठन हुआ और महामाया प्रसाद सिंह मुख्यमंत्री बने। यह ऐ...
कोसी नदी अपडेट - अगर वह नाव की रस्सी छोड़ देता तो हम लोगों का क्या होता, यह सोच कर डर लगता है

कोसी नदी अपडेट - अगर वह नाव की रस्सी छोड़ देता तो हम लोगों का क्या होता, यह सोच कर डर लगता है

बाढ़ की सच्चाई के विषय में मैंने श्रीमती पद्मश्री उषा किरण खान जी से बहुत कुछ सीखा है। एक संस्मरण और, वह कहती हैं। "एक विचित्र अनुभव है मेरा।...
कोसी नदी अपडेट - स्मृतिशेष पद्मश्री श्रीमती उषा किरण खान जी की जुबानी, 1976 बेगूसराय बाढ़ की कहानी

कोसी नदी अपडेट - स्मृतिशेष पद्मश्री श्रीमती उषा किरण खान जी की जुबानी, 1976 बेगूसराय बाढ़ की कहानी

स्मृतिशेष पद्मश्री श्रीमती उषा किरण खानबाढ़ की सच्चाई जानने के लिए मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है। एक संस्मरण और- यह 1976 की बेगूसराय की बाढ़ की ...
कोसी नदी अपडेट - कितनी बड़ी त्रासदी है यह..जिसके पास घर नहीं हैं उसका पता है सुल्तान पैलेस

कोसी नदी अपडेट - कितनी बड़ी त्रासदी है यह..जिसके पास घर नहीं हैं उसका पता है सुल्तान पैलेस

भावपूर्ण श्रद्धांजलिपद्मश्री डॉ श्रीमती उषा किरण खान से 2020 में हुई मेरी बातचीत के कुछ अंश उन्हीं के शब्दों में।“जिसके पास घर नहीं हैं उसका...
कोसी नदी अपडेट - बिहार: बाढ़-सुखाड़-अकाल, हजारीबाग और पलामू जिलों पर प्रभाव -1967

कोसी नदी अपडेट - बिहार: बाढ़-सुखाड़-अकाल, हजारीबाग और पलामू जिलों पर प्रभाव -1967

बिहार में स्वतंत्र भारत में पहला घोषित अकाल 1966-67 में पड़ा था, जिसका सर्वाधिक प्रभाव गया, हजारीबाग और पलामू जिलों पर पड़ा था। इसके बारे में ...
कोसी नदी अपडेट - बिहार 1966-67 का बाढ़-सुखाड़-अकाल और विधानसभा की बहस

कोसी नदी अपडेट - बिहार 1966-67 का बाढ़-सुखाड़-अकाल और विधानसभा की बहस

1966-67 में बिहार में न सिर्फ भयंकर अकाल पड़ा था, सरकार की ओर से उसकी घोषणा भी कर दी गयी थी। इस साल आम चुनाव भी हुआ था और राज्य में पहली बार ...
कोसी नदी अपडेट - बेगूसराय के मधुरापुर गाँव का भीषण अग्निकांड-1966

कोसी नदी अपडेट - बेगूसराय के मधुरापुर गाँव का भीषण अग्निकांड-1966

1966 बिहार में आपदा के इतिहास में अकाल के नाम से मशहूर है, पर अकाल पड़ने के पहले राज्य में आगलगी की घटनायें कुछ ज्यादा ही हुई थीं। अप्रैल मही...
कोसी नदी अपडेट - निर्मली के कोसी पीड़ितों के सम्मलेन में रखे गए प्रस्ताव

कोसी नदी अपडेट - निर्मली के कोसी पीड़ितों के सम्मलेन में रखे गए प्रस्ताव

फिर वही सत्तर साल का सवाल उठता है। निर्मली के कोसी पीड़ितों के सम्मलेन (5 और 6 अप्रैल 1947) के बारे में कोसी समस्या में रुचि रखने वाले आप जै...
कोसी नदी अपडेट - बिहार: बाढ़-सुखाड़-अकाल, गया के अकाल में कृषि की दयनीय स्थिति (1967)

कोसी नदी अपडेट - बिहार: बाढ़-सुखाड़-अकाल, गया के अकाल में कृषि की दयनीय स्थिति (1967)

गया में 1967 के अकाल में कृषि की जो स्थिति बन गयी थीं, उसके बारे में विशेष जानकारी के लिये हमने श्री चन्द्रभूषण सिंह, आयु 80 वर्ष, ग्राम श्र...
कोसी नदी अपडेट - 1958 में बिहार अकाल, मुंगेर जिले में फरदा दियारे में लगी आग

कोसी नदी अपडेट - 1958 में बिहार अकाल, मुंगेर जिले में फरदा दियारे में लगी आग

बिहार: बाढ़-सूखा-अकाल 1958 आग पानी में लगी...1958 की बात है। मुंगेर जिले के जून महीने के पहले सप्ताह में फरदा दियारे में लगी आग की वजह से पू...
कोसी नदी अपडेट - वर्ष 1958 में भागलपुर जिले का अकाल, ईं. दीपक कुमार सिंह के सौजन्य से श्रीमती पार्वती देवी जी से हुई चर्चा के अंश

कोसी नदी अपडेट - वर्ष 1958 में भागलपुर जिले का अकाल, ईं. दीपक कुमार सिंह के सौजन्य से श्रीमती पार्वती देवी जी से हुई चर्चा के अंश

बिहार -बाढ़-सूखा-अकाल 1958 आलेख: ईं. दीपक कुमार सिंह के सौजन्य से 1958 में भागलपुर जिले में जबर्दस्त सूखा पड़ा था। इसके बारे में विस्तृत जान...
कोसी नदी अपडेट - 1973 में बिहार अकाल, विधानसभा में श्री भोला प्रसाद सिंह के भाषण के कुछ अंश

कोसी नदी अपडेट - 1973 में बिहार अकाल, विधानसभा में श्री भोला प्रसाद सिंह के भाषण के कुछ अंश

बिहार -बाढ़-सूखा-अकाल 1973 1973 में बिहार में अकाल घोषित तो नहीं हुआ था पर परिस्थितियाँ किसी भी तरह उससे कम नहीं थीं। इसी मसले पर श्री भोला ...
कोसी नदी अपडेट - सुखाड़ और बाढ़ से एक के बाद एक तबाही-भागलपुर के बैजानी गाँव की कहानी-1960

कोसी नदी अपडेट - सुखाड़ और बाढ़ से एक के बाद एक तबाही-भागलपुर के बैजानी गाँव की कहानी-1960

भागलपुर जिले के जगदीशपुर प्रखण्ड के बैजानी गाँव का जिक्र बाढ़ और सूखे के सन्दर्भ में अक्सर प्रमुखता से आता है। 1960 में यहाँ सूखा पड़ा हुआ था ...
कोसी नदी अपडेट - श्रद्धांजलि पं. गोविन्द झा, 1954 की दरभंगा बाढ़ पर स्व पंडित जी से हुई चर्चा के अंश

कोसी नदी अपडेट - श्रद्धांजलि पं. गोविन्द झा, 1954 की दरभंगा बाढ़ पर स्व पंडित जी से हुई चर्चा के अंश

श्रद्धांजलि पं. गोविन्द झा जी पंडित गोविंद झा अब नहीं रहे पर आज से कोई तीन साल पहले उन्होंने मुझे 1954 की दरभंगा की बाढ़ के बारे में काफी कु...
कोसी नदी अपडेट - बिहार: बाढ़-सुखाड़-अकाल, समस्तीपुर के साख मोहन गांव की तबाही-1963

कोसी नदी अपडेट - बिहार: बाढ़-सुखाड़-अकाल, समस्तीपुर के साख मोहन गांव की तबाही-1963

दरभंगा जिले के समस्तीपुर सब-डिवीज़न के दलसिंहसराय अंचल में पिछले दिनों की भयंकर वर्षा से विभूतिपुर प्रखंड क्षेत्र में धान और मकई की फसल को भा...
कोसी नदी अपडेट - बिहार: बाढ़-सुखाड़-अकाल (1963), जितिया का वह पर्व जब लखीसराय का महिसौरा गांव उजड़ गया था

कोसी नदी अपडेट - बिहार: बाढ़-सुखाड़-अकाल (1963), जितिया का वह पर्व जब लखीसराय का महिसौरा गांव उजड़ गया था

(साभार: सर्व श्री सरोज कुमार सिंह, सुभाष दुबे, प्रवीर प्रवाह)महिसौरा गाँव बिहार के लखीसराय जिले के पश्चिमी छोर पर बसा हुआ है। यह तीन तरफ से ...
कोसी नदी अपडेट - महेन्द्रपुर (बेगूसराय) गाँव का कटाव 1962-63, आर्यावर्त-पटना, अगस्त-सितंबर (1963) की खबर

कोसी नदी अपडेट - महेन्द्रपुर (बेगूसराय) गाँव का कटाव 1962-63, आर्यावर्त-पटना, अगस्त-सितंबर (1963) की खबर

यूं तो महेन्द्रपुर गाँव को गंगा ने 1962 में ही काटना शुरू कर दिया था, पर इस गांव में 1963 के अगस्त माह में अचानक कटाव तेज हो गया था और पिछले...
कोसी नदी अपडेट - बिहार बाढ़, सुखाड़ और अकाल, मुजफ्फरपुर में 1962 में घटी एक हृदय विदारक नौका दुर्घटना

कोसी नदी अपडेट - बिहार बाढ़, सुखाड़ और अकाल, मुजफ्फरपुर में 1962 में घटी एक हृदय विदारक नौका दुर्घटना

बिहार -बाढ़-सुखाड़-अकालबिहार के उपर्युक्त विषय पर लिखते समय मुझे मुजफ्फरपुर में 1962 में घटी एक हृदय विदारक नौका दुर्घटना की जानकारी मिली, ज...
कोसी नदी अपडेट - पटना राइस से जुड़ी बेहद अहम जानकारी, जो बासमती को देता था टक्कर

कोसी नदी अपडेट - पटना राइस से जुड़ी बेहद अहम जानकारी, जो बासमती को देता था टक्कर

बासमती नहीं, पटना राइसकहते हैं कि बिहार के नालन्दा जिले के हिलसा इलाके से पिछली शताब्दी में पटना राइस के नाम से के चावल की किस्म लन्दन निर्य...
कोसी नदी अपडेट - नहरों और नदियों के तटबन्धों के टूटने का वृतांत 1976, बड़हिया (अन्तिम किस्त)

कोसी नदी अपडेट - नहरों और नदियों के तटबन्धों के टूटने का वृतांत 1976, बड़हिया (अन्तिम किस्त)

बड़हिया के श्री कृष्ण मोहन सिंह से हुई मेरी बातचीतउस समय यहां पक्के मकान तो बहुत कम थे। मिट्टी के गारे और पकाई गयी ईंटों के मकान जरूर थे। मि...
कोसी नदी अपडेट - बिहार में नहरों और नदियों के तटबन्धों का टूटना, 1968 में कोसी के दाहिने तटबंध के टूटने की कहानी

कोसी नदी अपडेट - बिहार में नहरों और नदियों के तटबन्धों का टूटना, 1968 में कोसी के दाहिने तटबंध के टूटने की कहानी

नहरों और नदियों के तटबन्धों का टूटनाकल मेरे एक मित्र ने मुझे खबर भेजी है कि गंडक नहर का बांध टूट गया और आधिकारिक तौर पर यह बताया गया के चूहो...
कोसी नदी अपडेट - नहरों और नदियों के तटबन्धों के टूटने का वृतांत 1976, बड़हिया

कोसी नदी अपडेट - नहरों और नदियों के तटबन्धों के टूटने का वृतांत 1976, बड़हिया

बड़हिया की सितम्बर,1976 की यादगार बाढ़1976 में सितम्बर महीने के तीसरे सप्ताह में पटना, मुंगेर (वर्तमान बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, लखीसराय, शेख...
कोसी नदी अपडेट - मंगरौनी और कछुआ गांव के आगे दरभंगा जिले के तारडीह प्रखंड के उजान गांव की कहानी

कोसी नदी अपडेट - मंगरौनी और कछुआ गांव के आगे दरभंगा जिले के तारडीह प्रखंड के उजान गांव की कहानी

मंगरौनी और कछुआ गांव के आगे दरभंगा जिले के तारडीह प्रखंड के उजान गांव की कहानीलेखक ने 1965 की कमला-बलान के पुल के दूसरी तरफ की बाढ़ के बारे ...
कोसी नदी अपडेट - विवाह लग्न का अन्तिम दिन और बिहार की 1965 की बाढ़

कोसी नदी अपडेट - विवाह लग्न का अन्तिम दिन और बिहार की 1965 की बाढ़

विवाह लग्न का अन्तिम दिन और बिहार की 1965 की बाढ़बिहार के दरभंगा जिले के मधुबनी सब-डिविज़न में जुलाई, 1965 के पहले पखवाड़े में भीषण बाढ़ आयी थी...
कोसी नदी अपडेट - बिहार बाढ़, सुखाड़ और अकाल, श्री कुमार शचीन्द्र सिंह से हुई चर्चा के अंश

कोसी नदी अपडेट - बिहार बाढ़, सुखाड़ और अकाल, श्री कुमार शचीन्द्र सिंह से हुई चर्चा के अंश

बिहार -बाढ़-सुखाड़ -अकालबीरपुर-सुपौल के 91 वर्षीय श्री कुमार शचीन्द्र सिंह से हुई मेरी बातचीत के कुछ अंशहमारा मूल गाँव आज के समस्तीपुर जिले ...
कोसी नदी अपडेट - 1960 का बिहार का सुखाड़ और उसके दुष्प्रभाव

कोसी नदी अपडेट - 1960 का बिहार का सुखाड़ और उसके दुष्प्रभाव

एक सुखाड़ यह भी - 1960पूर्णिया के कटिहार सब-डिवीजन में मई महीने में लगभग तीन चौथाई कुएं सूख चुके थे और अब उनमें से पानी के बदले कीचड़ ही निक...
कोसी नदी अपडेट - 1957 में बिहार में पानी के लिए खूनी संघर्ष

कोसी नदी अपडेट - 1957 में बिहार में पानी के लिए खूनी संघर्ष

पानी के लिये ख़ूनी संघर्ष- बिहार 19571957 में हथिया नक्षत्र का पानी न बरसने से शाहबाद जिले में फसल को बचाने के क्रम में पानी के उपयोग को लेक...

रिसर्च

©पानी की कहानी Creative Commons License
All the Content is licensed under a Creative Commons Attribution 3.0 Unported License.
Terms | Privacy